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श्री भुवाल माता जी मंदिर निर्माण का संक्षिप्त विवरण

छाजेड परिवार की कुल देवी का मुख्य स्थान बाड़मेर जिले के खेड़ नगर में है। कालान्तर में जब देश पर मुस्लिम आक्रमण हुए तभी समृद्ध नगर खेड़ पर भी मुस्लिम बादशाह मोहम्मद शाह व अहमद शाह ने आक्रमण किया और युद्ध में खेड़ नगर को तहस नहस कर दिया, परिणामतः खेड़ नगर उजड़ कर विरान हो गया। उसके पश्चात श्री भुवाल माताजी ने जोधपुर जिले के बिरामी गांव में जवाहरजी पुरोहित को दर्शन दिए। हंस पर सवार माताजी के दर्शन पाकर जवाहर जी ने माताजी से पूछा आप कौन देवी है तब माताजी ने कहा कि मैं छाजेडो की कुल देवी हूं। इस पर जवाहर जी ने कहा कि मेरे संतान नहीं है, आप पुत्र होने का वर दो तभी मै आपको मानूंगा। देवी ने पुरोहित को पुत्र होने का वर दिया। माताजी की कृपा से जवाहर जी को पुत्र की प्राप्ति हुई तथा जवाहर जी पुरोहित ने अपने खेत में माताजी का स्थान बना कर नियमित पूजा आरंभ की। तभी से भुवाल माता बिरामी गांव में प्रतिस्थापित हुए।


इस स्थान की छाजेड भाईयों को अधिक जानकारी नहीं हुई। खेड़नगर से ऊजड़ कर छाजेड देश भर में फैल गए। नजदीक के क्षेत्र के छाजेड बंधु इस स्थान पर दर्शनार्थ आते रहे। लेकिन जवाहर जी पुरोहित के परिवार जनों ने वर्षो तक माताजी की पूजा अर्चना की। कुछ वर्षो पश्चात सोजत के छाजेड बंधुओं ने इस स्थान पर मंदिर निर्माण का प्रयास किया लेकिन सफल नहीं हुए। माताजी के इस स्थान पर जाल का वृक्ष (झाड़) लगा हुआ था। तथा वहां चबूतरे पर त्रिशूल की पूजा होती रही।


बीसवीं शताब्दी के आठवें दशक में पुणे निवासी श्री भागचंद जी छाजेड एडवोकेट की धर्मपत्नी सौ. का. सुशीला बाई की अनंत श्रद्धा भक्ति से भुवाल माताजी ने उन्हें देवीय संकेत देकर बिरामी में मंदिर निर्माण कराने के निर्देश दिए।


सौ. का. सुशीला बाई द्वारा प्राप्त दैवीय संकेत के अनुसार पुणे से सौ. का. सुशीला बाई स्वयं, श्री भागचंद छाजेड़, श्री डोंगरचन्द छाजेड़ ने जोधपुर के छाजेड़ बंधुओं से संपर्क कर कई बार जोधपुर आकर विचार विमर्श किया तथा बिरामी में मंदिर निर्माण का निर्णय लिया। इसी निमित छाजेडो के राष्ट्रीय संगठन के रूप में अखिल भारतीय छाजेड़ परिवार मंडल का विधिवत् गठन प्रथम अधिवेशन में दिनांक 19/04/1975 को किया गया।


बिरामी में मंदिर निर्माण हेतु माताजी के स्थान वाली भूमि जवाहरजी पुरोहित के वंशज सुख जी पुरोहित ने सहर्ष प्रदान की। इसी मूल स्थान पर सौ. का. सुशीला बाई द्वारा प्राप्त देवीय संकेतो के निर्देशानुसार श्री भुवाल माताजी, श्री गजानन जी, श्री हनुमान जी और श्री काला भैरव की मूर्तियों का निर्माण करवाया गया। तथा माताजी के निर्देशानुसार वि. स. 2032 चैत्र शुक्ला अष्टमी(दिनांक 7/4/1966) को मंदिर के गर्भ गृह का निर्माण प्रारंभ किया गया जो दूसरे दिन ही माताजी की कृपा से पूर्ण हो गया तथा वि. स. 2032 चैत्र शुक्ल नवमी(दिनांक 8/4/1976) शुभ मुहुत में प्रात: 9 बजे से 1 बजे तक हजारों छाजेड़ बंधुओं की उपस्थिति में कुलदेवी भगवती श्री भुवाल माताजी, श्री गजानन जी, श्री हनुमान जी और श्री काला भैरव जी की भव्य प्राण प्रतिष्ठा गाजे बाजे से संपन्न हुई।


कुलदेवी श्री भुवाल माताजी के मंदिर निर्माण के आधार स्तंभ सौ. का. सुशीला बाई, श्री बी. एल. छाजेड, श्री डूंगरचंद जी छाजेड़ (निवासी – पुणे) तथा श्री धूलचंद जी, श्री पारसमल जी मेहता, श्री माणकमल जी(ढाढनिया वाले), श्री पुखराज जी मेहता(जसोल), श्री मोतीमल जी कोठारी, श्री जवेरीमल जी रूंटिया, जोधपुर निवासी, ने अथक परिश्रम कर महती भूमिका निभाकर प्रतिष्ठा संपन्न कराई।